दिनेश गुप्ता : जीवन कथा
बिरगंज। नेपाल के पर्सा जिल्ला, वीरगंज–१० में सन् 1965 में सरस्वती पूजा के पावन दिन जन्मल दिनेश गुप्ता नेपाली भोजपुरी साहित्य के प्रमुख रचनाकार, कवि आ साहित्यकार के रूप में पहिचान बनवले बाड़ें। बचपन से ही पढ़ाई-लिखाई आ साहित्य के प्रति उनकर गहिरा रुचि रहल। उच्च शिक्षा में उहाँ राजनीति शास्त्र में एम.ए. कइले आ बाद में साहित्यिक, सामाजिक आ सांस्कृतिक क्षेत्र में सक्रिय भइनी।

लेखन के यात्रा उहाँ 1985 में शुरू कइनी। उहाँ के पहिला लेख “धैर्य के प्रतिमूर्ति राजीव गांधी” साप्ताहिक दर्पण पत्रिका में प्रकाशित भइल। बाद में 1998 में पाण्डेय कपिल के संपादन में पटना से निकलत भोजपुरी सम्मेलन पत्रिका में ग़ज़ल प्रकाशित होखे के साथे उहाँ के विधिवत साहित्यिक यात्रा शुरू भइल।
दिनेश गुप्ता सिर्फ लेखक ही ना, बल्कि साहित्यिक संस्था आ पत्रकारिता से भी गहराई से जुड़ल रहल बाड़ें। उहाँ नेपाल प्रज्ञा-प्रतिष्ठान के पूर्व प्राज्ञ सभा सदस्य रहल बाड़ें आ गोरखापत्र राष्ट्रीय दैनिक से भी संबद्ध रहल बाड़ें। साथे ही उहाँ वीरगंज महानगरपालिका में नेपाल भोजपुरी प्रतिष्ठान के सलाहकार के रूप में योगदान देत रहल बाड़ें।

साहित्य के विकास खातिर उहाँ कई संस्था से जुड़ल बाड़ें। दिनेश गुप्ता प्रतिभा पुरस्कार आ जनमत प्रकाशन के संरक्षक के रूप में उहाँ नव लेखन के प्रोत्साहन देत रहल बाड़ें। साथे ही नेपाल के पुरान साहित्यिक पत्रिका ‘जनमत’ के भी संरक्षक बाड़ें।
दिनेश गुप्ता के साहित्यिक योगदान बहुत व्यापक बा। अलग-अलग भाषा आ विधा में उहाँ लगभग एक दर्जन से अधिक पुस्तक प्रकाशित कइले बाड़ें। भोजपुरी भाषा के विकास में उहाँ के खास योगदान रहल बा। उहाँ गोपाल ठाकुर आ गोपाल अश्क के साथ मिलके भोजपुरी शब्दकोश निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभवले बाड़ें। उहाँ के कई रचना सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त भोजपुरी पाठ्यक्रम में विद्यालय से लेके स्नातक स्तर तक शामिल बा, जे उहाँ के साहित्यिक महत्त्व के प्रमाण बा।

साहित्य के अलावा उहाँ संगीत क्षेत्र में भी योगदान देले बाड़ें। “चांद जइसन मुखड़ा” नाम से उहाँ के एक गीत एल्बम भी जारी भइल। पत्रकारिता में भी उहाँ सक्रिय रहल बाड़ें आ राष्ट्रीय सहारा दैनिक में “करैला के चोखा” नाम से नियमित स्तंभ लेखन कइले बाड़ें। साथे ही उहाँ अजोरिया, गमक आ महुआ जइसन साहित्यिक पत्रिका के संपादन भी कइले बाड़ें।

साहित्य आ समाज में योगदान खातिर उहाँ कई प्रतिष्ठित सम्मान से अलंकृत भइले बाड़ें। इनमें मधेश रत्न, हीरो ऑफ मधेश, जनसेवा सम्मान, विशिष्ट कवि अलंकरण आ जनमत ज्ञानरत्न मंगलतारा राष्ट्रीय सम्मान प्रमुख बा। इसके अलावा उहाँ कलवार जाति के 13 अतिसम्मानित व्यक्तियों में भी शामिल कइल गइल रहल।
दिनेश गुप्ता के प्रकाशित कृतियन में “मकरा के जाल” (कविता संग्रह), “भोर कब होई” (लघुकथा संग्रह आ ग़ज़ल संग्रह), “गांव अब गांव ना रहल” (कथा संग्रह), “अन्हार में एक रात” (निबंध संग्रह), “आन्हर के शहर में” (मुक्तक संग्रह), “हिरोशिमा” (हाइकु संग्रह), “फूल के आतंक” (अनुवाद), “मुक्त आकाश” (हिन्दी कविता संग्रह) आ “सेमर के फूल” जइसन महत्वपूर्ण पुस्तक शामिल बा।

नेपाली भोजपुरी साहित्य में उहाँ कई क्षेत्र में पहिल पहल कइले बाड़ें। भोर कब होई भोजपुरी के शुरुआती लघुकथा संग्रह में से एक मानल जाला। हिरोशिमा भोजपुरी के महत्वपूर्ण हाइकु संग्रह बा, जबकि अन्हार में एक रात निबंध संग्रह के रूप में खास पहचान बनवले बा।
अपन लेखनी, विचार आ साहित्यिक सेवा से दिनेश गुप्ता नेपाली भोजपुरी साहित्य के समृद्ध बनावे में महत्वपूर्ण भूमिका निभवले बाड़ें। आजो उहाँ के रचना साहित्य प्रेमियन के प्रेरित करत बा आ भोजपुरी भाषा के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देत बा।








